कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघ के हमले से नर तेंदुए की मौत, पोस्टमार्टम में पुष्टि

Fri 20-Feb-2026,09:15 PM IST +05:30

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कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघ के हमले से नर तेंदुए की मौत, पोस्टमार्टम में पुष्टि Kanha Tiger Reserve News
  • कान्हा टाइगर रिजर्व में नर तेंदुए का शव मिला.

Madhya Pradesh / Mandla :

Mandla / मध्य प्रदेश के मंडला जिले स्थित प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक अहम और चिंताजनक घटना सामने आई है। रिजर्व के लामादादर बीट के कक्ष क्रमांक 832 में एक नर तेंदुए का शव बरामद किया गया है। प्रारंभिक जांच में वन विभाग ने आशंका जताई है कि तेंदुए की मौत बाघ के हमले के कारण हुई है। शव पर बाघ के दांतों के गहरे निशान पाए गए हैं, जो आपसी संघर्ष की ओर इशारा करते हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही सक्रिय हुआ अमला
कान्हा टाइगर रिजर्व प्रशासन के अनुसार, ‘जरियावारे पगवंती पारा’ क्षेत्र से तेंदुए के मृत पाए जाने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) नई दिल्ली और प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मध्य प्रदेश द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

वन विभाग ने आसपास के क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान भी चलाया, ताकि किसी अन्य वन्यजीव या असामान्य गतिविधि के संकेत मिल सकें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह घटना प्राकृतिक वन्यजीव संघर्ष का परिणाम प्रतीत होती है, फिर भी हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।

पोस्टमार्टम में क्या सामने आया?
मृत तेंदुए का पोस्टमार्टम विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया गया। वन्यजीव पशु चिकित्सक डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. दीपाली परते और डॉ. सुरेंद्र टेकम ने संयुक्त रूप से परीक्षण किया। विस्तृत जांच के बाद यह पाया गया कि तेंदुए के शरीर के अन्य सभी अंग सुरक्षित थे और किसी प्रकार की अवैध गतिविधि या शिकार के संकेत नहीं मिले।

हालांकि, तेंदुए के सिर पर बाघ के केनाइन (दांतों) के गहरे घाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घाव बेहद ताकतवर प्रहार का परिणाम है, जो आमतौर पर बाघ और तेंदुए के बीच क्षेत्रीय संघर्ष में देखने को मिलता है। इस आधार पर विभाग ने अनुमान जताया है कि तेंदुए की मृत्यु बाघ के हमले से हुई।

निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार
घटना की गंभीरता को देखते हुए तेंदुए के शव का अंतिम संस्कार निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत किया गया। इस दौरान वरिष्ठ वन अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी, उप संचालक प्रकाश कुमार, सहायक वन संरक्षक सूरज सिंह, NTCA प्रतिनिधि ओंकार नर्रे, तहसीलदार शंकर मरावी, मानद वन्यजीव वार्डन बनप्रेश खरे और सरपंच श्यामवती चैके सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

पूरी पोस्टमार्टम और दाह संस्कार प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई, ताकि आधिकारिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके और भविष्य में किसी भी जांच के लिए साक्ष्य उपलब्ध रहें।

प्राकृतिक संघर्ष या बढ़ता दबाव?
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ और तेंदुए दोनों ही शीर्ष शिकारी (टॉप प्रिडेटर) हैं और अक्सर क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर इनके बीच संघर्ष होता है। कान्हा जैसे घने जंगलों में ऐसे संघर्ष असामान्य नहीं हैं। हालांकि, यह घटना एक बार फिर जंगल के भीतर बदलते पारिस्थितिक संतुलन और संसाधनों पर बढ़ते दबाव की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।

फिलहाल वन विभाग इस मामले को प्राकृतिक आपसी संघर्ष मान रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच जारी है। कान्हा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसी घटनाओं की सतत निगरानी की जाएगी।